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Saturday, February 11, 2012

एक गुलाब !


एक गुलाब टांक दो
मेरे कोट की बटन होल में,
एक गुलाब खोंस दूं
तेरे बालों के जूडे में.

देखें...
कौन किस पर मर मिटता है?
तू.. मुझपर,
या मैं तुझपर
या फिर
ये गुलाब मर मिटे
हमारी किस्मत पर.

अगर जो कोई
ज़माने में
देखकर हमें जले
तो...भेज दो
उसके भी घर
टोकरी भर गुलाब !!

Copyright@संतोष कुमार ‘सिद्धार्थ’, २०१२ 


आप सबों को 'प्रेम-दिवस' (Valentine Day) की हार्दिक शुभकामनाएं. एक विनम्र निवेदन है कि अगर दुनिया में  खुशी,  मुस्कान और प्यार बिखेरना चाहते हों तो गुलाब भेंट करना ना भूलें.

Thursday, February 2, 2012

सुनयना ..सुनो ना !


अरी ओ सुनयना ..
जरा करीब तो आओ
बैठो ..पास हमारे
और सुनो..तो
ये बसंती हवा
कहाँ बहती जाए,
क्या कहती जाए
क्यूँ हवा में
खुशबू सी लहराए
क्यूँ भौंरा
फूलों को गुदगुदाए
ये मदमाती साँझ
किसका नाम बुलाए
अब और
कैसे इशारे करूं
तुझे समझाने को,
पास बुलाने को,
जो ना समझ आये
मेरे शब्दों से
चाहो तो ..,
उसे भी सुन लो
लगकर गले मुझसे,
मेरे दिल की धडकनों में..
मेरी मनुहार
ना सही ..
इस ऋतु के जादू का
मान तो रख लो ना..
अरी सुनयना ..सुनो ना !

Copyright@संतोष कुमार ‘सिद्धार्थ’, २०१२ 

Friday, December 23, 2011

प्यार की बातें


तुम
भूल जाना
जान बूझ कर
घर की अलार्म घडी में चाबी भरना
और ..
टांग देना
परदेश से भेजी
मेरी चिट्ठियों का बस्ता
घंटाघर की घडी के
घंटे की चरखी में

मैं भी
कोशिश में हूँ
चुरा लूँगा
सारे घोड़े
सूरज के अस्तबल से
जानती हो..
जगह देख रखी है
झील के करीब
हरसिंगार के बागान के पीछे
बांस के झुरमुट में छिपे
विशाल बरगद की गोद में

तुम तो रहोगी ना..
मेरा साथ देने को
पक्की खबर है..
अरसे बाद
आज से तीसरे दिन
चाँद..गगन से उतरकर
चांदनी से मिलने को ,
घंटों बातें करने को
आने वाला है..
फिर से कहता हूँ
भूलना नहीं
अभी से लगा लो
कैलेंडर में
मेहंदी के सुर्ख निशान.

Copyright@संतोष कुमार ‘सिद्धार्थ’, २०११