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Sunday, February 26, 2012

तिनके का दर्द


एक तिनका
न जाने क्यूँ
बाकी रह गया
घोंसले में
सजने से

जी रहा है..
आजकल डर–डर के
गिन रहा है
सांसे.. इस चिंता में
हवा उड़ा न ले जाए
पानी बहा न दे
धुप जला न दे
मिट्टी दफ़न न कर दे
उसके अस्तित्व को..

सोंचता रहता है..
अब कैसे निहारेगा ?
नजदीक से
प्यारी चिड़िया को ,
कैसे देखेगा ?
चिड़िया के बच्चों को,
चहकते हुए,
पंख फैलाते हुए,
जीने का अंदाज..
सीखते हुए .

Copyright@संतोष कुमार ‘सिद्धार्थ’, २०१२ 

Friday, December 23, 2011

प्यार की बातें


तुम
भूल जाना
जान बूझ कर
घर की अलार्म घडी में चाबी भरना
और ..
टांग देना
परदेश से भेजी
मेरी चिट्ठियों का बस्ता
घंटाघर की घडी के
घंटे की चरखी में

मैं भी
कोशिश में हूँ
चुरा लूँगा
सारे घोड़े
सूरज के अस्तबल से
जानती हो..
जगह देख रखी है
झील के करीब
हरसिंगार के बागान के पीछे
बांस के झुरमुट में छिपे
विशाल बरगद की गोद में

तुम तो रहोगी ना..
मेरा साथ देने को
पक्की खबर है..
अरसे बाद
आज से तीसरे दिन
चाँद..गगन से उतरकर
चांदनी से मिलने को ,
घंटों बातें करने को
आने वाला है..
फिर से कहता हूँ
भूलना नहीं
अभी से लगा लो
कैलेंडर में
मेहंदी के सुर्ख निशान.

Copyright@संतोष कुमार ‘सिद्धार्थ’, २०११

Monday, November 7, 2011

प्रेम की सीमा

आखिर मान ली मैंने
तुम्हारी बात..
करने को सीमित
अपना प्यार
आज तक ,    अभी-तक
इस जनम भर के लिए.

चलो !
छोड़ आयें
आज गंगा में
मेरे – तुम्हारे खत,
ग्रीटींग-कार्ड,
इत्र की शीशियाँ ,
कुछ सूखे फूल
नाम लिखे गिलाफ
और रूमाल भी

आओ !
अर्पित कर दें
इन्ही लहरों में
दुनिया के डर से 
जीए हुए आधे – अधूरे ..
हसीन लम्हे भी.

पर मैं कैसे रोक पाऊंगा ?
और कौन रोक सकता है ??
निश्छल , निर्बाध और निडर..
असीम और पवित्र प्रेम के असर को ...
तुम्हें भी पता हैं
अब भी लाखों लोग
लगाते हैं रोज डूबकी..
इसी गंगा के पानी में !!

Copyright@ संतोष कुमार सिद्धार्थ”, २०११
(मेरे संकलन – आधा-अधूरा प्यार से)

Thursday, October 6, 2011

तेरे सपने

मेरे लिए
बड़ा आसान सा है..
हर रोज ..तेरे सपने देखना


बस...
गुलाबी कागज़ पर 
उलटे हाथ से
तुम्हारा नाम लिखकर ..
तकिये के नीचे
डाल देता हूँ.


पर.. जरा सी
मुश्किल रहती है...
नहीं समझा पाता 
घर में अम्मा को
सुबह-सुबह...
मेरी उनींदी और
सूजी हुई
आँखों  का राज़..


Copyright@Santosh kumar
(मेरी कविता संग्रह : आधा-अधूरा प्यार से)





Wednesday, August 24, 2011

तस्वीर


अच्छा है
किसी
तस्वीर से प्यार करना
वो
कभी रूठती नहीं
कभी दूर नहीं जाती
कोई शिकवा नही
बस
रहती है
मेरे सामने
हर दिन, हर पल
अपलक निहारती..मुस्कुराती सी
तो..
अच्छा है ना!
किसी तस्वीर से प्यार करना.

copyright@Santosh kumar, 1995