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Monday, September 17, 2012

मैं और तुम

१.
तुम्हे पता है..?
मेरे बारे में
लोग कहते हैं
कि मैं,  मैं नहीं
कोई और होता हूँ
जब भी मैं
लिख रहा होता हूँ...
कोई गीत,
कोई कविता
तुम्हारे बारे में !

२.
मन मेरा
घूम आया
बन बंजारा
सात समुन्दर पार से
पर तुम मुझे
यही मिलीं
मेरे ही शहर में
पड़ोस की छत पर
भींगे -गीले बाल सुखाते हुए
मैं ही भोला था
समझ न सका 
समय पर .. तेरे इशारों को.

Copyright@संतोष कुमार 'सिद्धार्थ', २०१२.


Thursday, September 6, 2012

पुरुषार्थ

सैंकडो लोग तालियाँ बजा रहे थे
जोर - जोर से
नाम ले रहे थे ..
उस प्रतिभागी का
जो विजयी हुआ था
दौड की प्रतिस्पर्धा में
पर मैंने देखा..
लोगों के हुजूम से हटकर
एक और भी  प्रतिभागी था
अपने चेहरे पर
विजेता सरीखी मुस्कान ओढ़े हुए
आँखों में उसकी
जरा सा भी मलाल न था..
तकदीर से उसका
कोई भी सवाल न था
उसका पुरुषार्थ कहीं भी पीछे न था , 
वो हार कर भी
जीत गया था
प्रतिस्पर्धा को..
उसने पूरा किया था
माँ को दिया हुआ वचन
अपने स्वाभिमान का, 
आत्मविश्वास का प्रण
कि भले ही वो हारे या जीते
वो दौडेगा जरूर...
भले ही सफलता मंजिल
खड़ी रह जाये... उससे थोड़ी दूर.

Copyright@संतोष कुमार 'सिद्धार्थ', २०१२.





Friday, July 20, 2012

अधूरे जज्बात : क्षणिकाएं

१.
कहों...
क्या दिखता है?
तुम्हें मेरी आँखों में
इनमें बसें हैं
तुम्हारे सपनों के स्वेटर पहने 
मेरे हजार सपने
जो जी रहें हैं,
पल रहें हैं 
बड़ी  खूबसूरती से,
आत्मविश्वास से 
जीवन की कड़ी सर्दी में .


२.
जी करे
फिर से मैं
बनूँ सांवरा
रहूँ बावरा
और भागता फिरूं 
तुझ राधिका के पीछे
यहाँ - वहाँ
भूलकर मैं 
अपना आज, अपना काल
अपना नाम ..
और अपनी पहचान भी. 

Copyright@संतोष कुमार 'सिद्धार्थ', २०१२

Tuesday, July 3, 2012

तेरी तलाश में...

१.
यूँ तो अक्सर
मेरा नाम सुनकर
तुम्हारा दिल धडकता है
पर क्या
कोई मुल्क है?
कोई जुबान है?
जिसमें होता हो 
तर्जुमाँ मेरे नाम का 
तुम्हारा नाम !


२.
कहते हैं
ढूँढो जो अगर
लगन से,
धीरज से
तो ईश्वर भी मिल जातें है
यही सोंचकर
तुम्हे ढूँढने चला हूँ मैं !

Copyright@संतोष कुमार 'सिद्धार्थ', २०१२