Thursday, October 6, 2011

तेरे सपने

मेरे लिए
बड़ा आसान सा है..
हर रोज ..तेरे सपने देखना


बस...
गुलाबी कागज़ पर 
उलटे हाथ से
तुम्हारा नाम लिखकर ..
तकिये के नीचे
डाल देता हूँ.


पर.. जरा सी
मुश्किल रहती है...
नहीं समझा पाता 
घर में अम्मा को
सुबह-सुबह...
मेरी उनींदी और
सूजी हुई
आँखों  का राज़..


Copyright@Santosh kumar
(मेरी कविता संग्रह : आधा-अधूरा प्यार से)





23 comments:

  1. ख़ूबसूरत एहसास के साथ शानदार रचना लिखा है आपने! उम्दा प्रस्तुती!

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  2. मतलब इतनी खूबसूरती से आपने रात का किस्सा बयान किया है कि मैं क्या कहूं......आफरीन.....अब तो मैंने आपका फोलोवर बन गया हूँ सो आता रहूँगा!

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  3. Santosh jee, very lovely small poem, like an innocent child..
    bahut hi pyrai si kavita....

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  4. जो फिर ख्वाब देखकर राज़ बनेगा ..आज.

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  5. इस पृष्ठ की सबसे अच्छी कविता यही लगी।

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  6. @बबली : शुक्रिया..मैं और भी बेहतर लिखने की कोशिश करूँगा.

    @सुरेन्द्र : ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया. आप की रचनाएँ भी बड़ी अच्छी हैं.

    @P Dwivedi : Praveen ji, love is very precious feeling, real love is always innocent. Thanking you for appreciation.

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  7. बहुत ही खूबसूरत है इन उनींदी सूजी हुई आँखों का राज़..

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  8. खूब.
    बहुत ही खूब.

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  9. आपको पढ़ा अच्छा लगा ,लगनशील प्रयास ,सपनों को पंख मिले , मेरी शुभकामनायें आपके साथ सदैव ..../ भाषा अनुशीलन , व परिमार्जन का ख्याल मनः स्थिति को संतुलित रखता है .....शुक्रिया जी /

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  10. बस...
    गुलाबी कागज़ पर
    उलटे हाथ से
    तुम्हारा नाम लिखकर ..
    तकिये के नीचे
    डाल देता हूँ.
    waah

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  11. बहुत ही खूबसूरत रचना

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  12. @संध्या शर्मा : सराहना के लिए धन्यवाद.

    @विशाल : शुक्रिया.

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  13. @uday Veer Singh : सुझाव और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद.

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  14. @ रश्मि प्रभा जी : मेरी कविता के अवलोकन के लिए धन्यवाद.

    @ वर्ज्य नारी स्वर : शुक्रिया.

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  15. खूबसूरती से उकेरा है एहसासों को.

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  16. वाह-वाह क्या बात है बहुत खूब शानदार प्रस्तुति ...समय मिले तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है।
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/

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  17. पढ़ा…निर्दोष और शुरूआती दौर की…शायद प्रदर्शन ठीक नहीं होता वैसे…

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  18. सुंदर।
    गहरी भावाभिव्‍यक्ति।

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  19. क्या सच इतना आसान होता है , अपनी प्रेयसी के सपने देखना !!
    अच्छी रचना है.

    मनोहर

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  20. is sundar kavita ko padvane ke liye apka abhar
    ashok andre

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  21. बहुत बढ़िया बात कही आपने...कितना मुश्किल होता है औरों को समझाना अपनी सूजी और लाल आँखों का राज़.

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बताएं , कैसा लगा ?? जरुर बांटे कुछ विचार और सुझाव भी ...मेरे अंग्रेजी भाषा ब्लॉग पर भी एक नज़र डालें, मैंने लिखा है कुछ जिंदगी को बेहतर करने के बारे में --> www.santoshspeaks.blogspot.com .