Friday, May 25, 2018

मैं और तुम 
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मेरे ईश  . मेरे प्रिय !
चाहो तो 
बाँध लो सुरों में 
गा लो मुझे
चाहो तो 
लिख लो,
पिरो लो .. 
एक माला में मुझे !

संतोष कुमार 'सिद्धार्थ'

Monday, April 11, 2016

मैं और तुम !

बस इतना सा
फर्क है
मुझमे...
और तुझमे...
तुम अक्सर आये
बिन बताये
मिले,
ख्याल बनकर ,
रहे सपनों में,
प्रार्थना में !
और मैं
तुम्हे ढूंढ रहा...
झांक रहा
खिड़कियों से,
पर्दों की ओट से,
दर पर खडा
लंबी कतारों में
मिलने की आस लिए !!

Copyright@संतोष कुमार 'सिद्धार्थ', २०१६ 

Friday, November 13, 2015

मन की भाषा , मन का देश !

जहाँ....
आँखों के इशारे भर से
दुनिया की
तस्वीर बदलती है !
जहाँ ...
कोई जोर नहीं,
कोई शोर नहीं
सभी समझते हैं
मन ही मन...
मन की भाषा
वहीँ चलना है,
वहीँ बसना है !!

Copyright@संतोष कुमार 'सिद्धार्थ',2015

Thursday, July 30, 2015

कुछ बातें!

मैं सोंचता हूँ...
क्यों ना
लिख लूं
और बाँच भी लूं
खुद ही 
कुछ चिट्ठियाँ
मेरे - तुम्हारे नाम की !

क्या होगा..
थोडा मन हल्का होगा
थोडा भारी होगा..
याद आएँगी
कुछ बातें
बरसों पुराने  शाम की !

ऐसे में ही, कहीं दूर..
कोई बादल
भिगो जायेगा 
तुम्हारे झरोखे के परदे 
शायद ...तब कहीं ,
तुम्हे भी बोध होगा
और लिखोगी सच में 
एक खत मेरे नाम की !

Copyright@संतोष कुमार 'सिद्धार्थ',2015

Wednesday, February 11, 2015

कुछ मेरे Facebook पोस्ट से

मैंने पिछले दिनों Facebook  पर पोस्ट किया :

तलाश
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ढूंढ रहा हूँ
नयी राह
बुन रहा हूँ
नया सपना
अनुभव है ..
आधी जिंदगी का
देखूँगा .. जिंदगी को
नए चश्मे से !!



मेरा नाम 
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मुझे 
पसंद नहीं था
नाम वालों की 
भीड़ में खो जाना..
कुछ ऐसे ही याद कर लेना
मुझ अनाम को !!


Copyright@संतोष कुमार 'सिद्धार्थ', २०१५

Monday, November 10, 2014

साधना !

एक साधु ने कहा
रख तू
मन का ख्याल भी
दे समय
कर निहाल इसे भी
सुन इसकी भी कुछ..

ये बाँट लेगा
दुःख तुम्हारे
रहेगा जो हर पल
साथ तुम्हारे

हो सके ..तो
कर साधना !
साध ले इसे
प्रभु भी सोचेंगे
करेंगे वास यही
चौराहे का मंदिर छोड़कर !

copyright @संतोष कुमार 'सिद्धार्थ ', 2014

Saturday, May 3, 2014

रिश्ता : मेरा - तुम्हारा

तू...
कविता है
गीत है
छंद है
भाव है
बसी रहती हो
शब्दों की लड़ियों में 
पुस्तकों के पन्नों में
मैं ...
आवरण हूँ 
पृष्ठभूमि हूँ
रक्षक हूँ
तुम्हारे सौंदर्य का...
तुम सहज स्वप्न हो
मैं यथार्थ हूँ..
बस ..
यही परिभाषा है
इतना सा है
मेरा - तुम्हारा रिश्ता !

Copyright@ संतोष कुमार 'सिद्धार्थ', २०१४.