Wednesday, February 11, 2015

कुछ मेरे Facebook पोस्ट से

मैंने पिछले दिनों Facebook  पर पोस्ट किया :

तलाश
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ढूंढ रहा हूँ
नयी राह
बुन रहा हूँ
नया सपना
अनुभव है ..
आधी जिंदगी का
देखूँगा .. जिंदगी को
नए चश्मे से !!



मेरा नाम 
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मुझे 
पसंद नहीं था
नाम वालों की 
भीड़ में खो जाना..
कुछ ऐसे ही याद कर लेना
मुझ अनाम को !!


Copyright@संतोष कुमार 'सिद्धार्थ', २०१५

Monday, November 10, 2014

साधना !

एक साधु ने कहा
रख तू
मन का ख्याल भी
दे समय
कर निहाल इसे भी
सुन इसकी भी कुछ..

ये बाँट लेगा
दुःख तुम्हारे
रहेगा जो हर पल
साथ तुम्हारे

हो सके ..तो
कर साधना !
साध ले इसे
प्रभु भी सोचेंगे
करेंगे वास यही
चौराहे का मंदिर छोड़कर !

copyright @संतोष कुमार 'सिद्धार्थ ', 2014

Saturday, May 3, 2014

रिश्ता : मेरा - तुम्हारा

तू...
कविता है
गीत है
छंद है
भाव है
बसी रहती हो
शब्दों की लड़ियों में 
पुस्तकों के पन्नों में
मैं ...
आवरण हूँ 
पृष्ठभूमि हूँ
रक्षक हूँ
तुम्हारे सौंदर्य का...
तुम सहज स्वप्न हो
मैं यथार्थ हूँ..
बस ..
यही परिभाषा है
इतना सा है
मेरा - तुम्हारा रिश्ता !

Copyright@ संतोष कुमार 'सिद्धार्थ', २०१४.

Friday, March 28, 2014

खोज !

कभी - कभी
सत्य भी 
भाव रूप छोड़ कर
पात्र रूप में
खोज रहा होता है
हमें ..वैसे ही
जैसे हम उसे
और हम दोनों ही
आस-पास होते हैं
गुजर जातेहैं 
अगल-बगल से
बस ..पहचान नहीं पाते !

Copyright@संतोष कुमार 'सिद्धार्थ', २०१४ 

Friday, January 10, 2014

खोज !

मैं
ढूंढ लेता हूँ
तुम्हे..
अक्सर ही
पर ..खुद को खो कर !

Copyright@संतोष कुमार 'सिद्धार्थ', २०१४

Tuesday, October 8, 2013

दूरी

बढती जा रही है
दूरी..
हर रोज 
शहरों की
गाँव से !

हो रहा है
अलग 
हर रोज 
एक सगा 
अपने ही दूसरे से !

मैंने कई बार 
ऐसा सुना है
शहरी स्कूलों के बच्चे
गाँव में
बस रहे भाई को
ड्राईवर का सगा बता रहे थे !

Copyright@संतोष कुमार "सिद्धार्थ", २०१३


Sunday, August 25, 2013

पहचान !

क्षितिज से कुछ दूर सही
धुंधले ..उभरते सायों में
तेरी तरफ भाग रहा 
मैं भी हूँ !
हाथों में पुष्प लिए..
उल्लसित मन लिए 
आतुर हूँ...
मिलने को !
मुझको है ..भान तेरा
तू भी पहचान मुझे
कुछ कदम मैं चलूँ!
कुछ कदम तुम चलो!

Copyright@संतोष कुमार 'सिद्धार्थ', २०१३