Friday, December 16, 2011

प्रेमगीत


जब भी मैं 
लिखना चाहूँ 
कोई नया..प्रेमगीत
पूछता है 
हर अगला हरफ
मुझसे बार-बार
तेरी तस्वीर की तरफ
इशारे करके
इसमें तेरा नाम कहाँ है?
इसमें मेरा नाम कहाँ है?
Copyright@संतोष कुमार "सिद्धार्थ", २०११ 

17 comments:

  1. बहुत सुन्दर...

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  2. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  3. क्या बात है, बहुत सुंदर रचना !
    आभार !!

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  4. नाम आये न आये... प्रेम है अगर तो बनी रहेगी कविता!
    शुभकामनाएं!

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  5. बहुत ही सुन्दर रचना ...

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  6. वाह ...बहुत बढि़या।

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  7. बहुत सुंदर कविता.

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  8. बहत सुंदर रचना..

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  9. बहुत बढ़िया... वाह!
    सादर.....

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  10. हर हरफ सच ही तो कहता है . बेहद खुबसूरत ..

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  11. क्या खूब कही ...बिना महबूबा के नाम के आपने हिम्मत कैसे की प्रेमगीत लिखने की..??

    सुन्दर नज्म

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  12. और मेरा नाम कहाँ है??

    सच ! सुन्दर नज्म.

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बताएं , कैसा लगा ?? जरुर बांटे कुछ विचार और सुझाव भी ...मेरे अंग्रेजी भाषा ब्लॉग पर भी एक नज़र डालें, मैंने लिखा है कुछ जिंदगी को बेहतर करने के बारे में --> www.santoshspeaks.blogspot.com .