Wednesday, April 25, 2012

प्रार्थना

हे प्रभु!
तू
गड़ेरिया बनकर
धरती पर आ
ले चल अपने साथ 
मैं थक गया...
अपनी करते-करते 
आदमी बन, 

चल हाँक ले चल
मुझ मेमने को
तू ही जाने
कौन हूँ,
कहाँ से आया हूँ,
और 
कहाँ मुझे जाना है ??


Copyright@संतोष कुमार 'सिद्धार्थ', २०१२.

10 comments:

  1. very nice words.

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  2. बहुत सुंदर.............

    थक जाना....मगर हारना मत....

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    1. कभी - कभी परमात्मा के पास पूरी तरह से समर्पित हो जाना अनुपम सुख की अनुभूति लेकर आता है .. यही व्यक्त करने की कोशिश की है मैंने.

      शुक्रिया !

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  3. अनुपम भाव संयोजन ।

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  4. हमारी भी यही प्रार्थना है..आमीन...

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  5. हाँ प्रभु ... कब तक मासूम मेमनों को जंगल में छोड़ेगा तू
    मुझे भी इंतज़ार है

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  6. सब प्रभु की इच्छा ....

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  7. प्रभु के प्रति समर्पण की सच्ची भावना...

    आभार

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